छत्तीसगढ़

जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला: अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

बिलासपुर, 2 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूर्व में दिए गए आदेश को पलटते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अपील स्वीकार कर ली है और मुख्य आरोपी अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट पहुंचा था। दरअसल, सीबीआई और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पहले के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 को दिए अपने आदेश में देरी को माफ करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए हाई कोर्ट को भेजा था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बीपी शर्मा ने दलील दी कि पहले अपील को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया था, जबकि मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार होना चाहिए था। वहीं, सीबीआई की ओर से अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से अदालत से अपील स्वीकार करने की मांग की।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा शामिल थे, ने सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सीबीआई की अपील को स्वीकार कर लिया। अदालत ने आरोपी अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, रायपुर पुलिस अधीक्षक को नोटिस तामिल कराने और इसकी रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

हाई कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब मामले में कानूनी प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में और अहम घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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