आखातीज : पहले मूक पशुओं को चारा-पानी, फिर मनाया जाएगा त्योहार
अक्षय तृतीया पर जीवदया का संदेश

रायपुर, 19 अप्रैल 2026। अक्षय तृतीया (आखातीज) के पावन अवसर पर शहर में धार्मिक आस्था के साथ जीवदया का संदेश भी प्रमुख रूप से दिया जा रहा है। सीमंधर स्वामी जैन मंदिर एवं चमत्कारी जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, भैरव सोसायटी में श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के जीवन प्रसंग से प्रेरणा लेते हुए पहले मूक पशु-पक्षियों को चारा-पानी देने का संकल्प लिया, उसके बाद ही त्योहार मनाने का निर्णय किया।
आदिनाथ भगवान के जीवन से मिली प्रेरणा
श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के उस प्रसंग को याद किया, जिसमें उन्होंने एक बैल पर हो रही क्रूरता को रोकने के लिए उसके मालिक को सलाह दी थी। दरअसल एक बैल बार-बार खाने की सामग्री में अपना मुंह डाल रहा था और उसका मालिक इसके लिए उसे पीट रहा था। भगवान आदिनाथ उस बैल की पिटाई से दुखी हो रहे थे, और जीवदया के भाव से उन्होंने उसके मालिक को सलाह दी कि वह इसके मुँह पर छिलका बांध दोगे तो यह खाद्य सामग्री में मुँह नहीं डाल पाएगा। मालिक ने ऐसा ही किया। हालांकि इससे बैल की पिटाई तो रुक गई, लेकिन भोजन में बाधा उत्पन्न हुई। इसी कर्मफल के कारण भगवान आदिनाथ को दीक्षा के बाद 1 वर्ष 39 दिन तक उपवास करना पड़ा और अक्षय तृतीया के दिन उनका पारणा हुआ। यह घटना जीवों के प्रति संवेदनशीलता और करुणा का संदेश देती है।
पहले जीवदया, फिर उत्सव
इस प्रेरणा से प्रभावित होकर कई श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मूक पशुओं को रोटी, चारा या अन्य खाद्य सामग्री खिलाने के पश्चात ही नवकारसी करेंगे। इसके बाद पारंपरिक भोजन जैसे खीच, घी, इमली और बड़ी की सब्जी का सामूहिक रूप से सेवन किया जाएगा।
सेवा कार्यों की भी तैयारी
मंदिर एवं दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद और महासचिव महेंद्र कोचर ने बताया कि घुमंतू पशु-पक्षियों के लिए चारा, दाना और पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही सोमवार को भैरव सोसायटी स्थित सीमंधर स्वामी जैन मंदिर परिसर में सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक सकोरे (पानी के बर्तन) का वितरण भी किया जाएगा।
इस आयोजन के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि त्योहार केवल उत्सव का नहीं, बल्कि करुणा और सेवा का भी अवसर होता है।



