छत्तीसगढ़

अब चंदेरी की चरागाह भूमि उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी : अकबर

कहा: कबीरपंथ को सीएम का आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश दरकिनार

रायपुर, 9 अगस्त 2026। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील के ग्राम चंदेरी में चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए दिए जाने के मामले में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 23.93 हेक्टेयर यानी 59 एकड़ चरागाह भूमि को नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के आधिपत्य में सौंपा गया है।

अकबर ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री द्वारा दामाखेड़ा में कबीरपंथ के कार्यक्रम के दौरान दिए गए आश्वासन और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भावना के विपरीत है। उन्होंने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री के आश्वासन का हवाला

पूर्व मंत्री ने कहा कि 23 फरवरी 2024 को दामाखेड़ा में कबीरपंथ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग नहीं लगाने का आश्वासन दिया था। अकबर के मुताबिक, इसके बावजूद चंदेरी में लगभग 23.93 हेक्टेयर चरागाह भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उद्योग विभाग को सौंप दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह मामला राजस्व मंत्री के गृह जिले से जुड़ा है और ग्रामीणों के निस्तार तथा पशुओं के लिए उपयोग होने वाली जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां भी सामने आई हैं।

चार खसरों की जमीन उद्योग विभाग को देने का दावा

अकबर ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2011 के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि को भविष्य में अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि चंदेरी के खसरा नंबर 1660, 2206, 2207 और 1743 की कुल करीब 23.93 हेक्टेयर भूमि को 6 फरवरी 2026 को उद्योग विभाग के आधिपत्य में दिया गया।

अकबर के अनुसार, नायब तहसीलदार सिमगा की 19 जनवरी 2025 की ऑर्डर शीट में ग्राम पंचायत चंदेरी की आपत्ति का भी उल्लेख था। इसके बावजूद बाद में भूमि का आधिपत्य उद्योग केंद्र बलौदाबाजार को सौंप दिया गया।

ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के विरोध का भी दावा

पूर्व मंत्री ने कहा कि 20 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत चंदेरी की बैठक में उक्त भूमि को उद्योग के लिए हस्तांतरित नहीं करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को ग्राम सभा ने भी चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए देने का विरोध किया।

अकबर ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद भुइयां पोर्टल पर संबंधित खसरों की जमीन संचालक उद्योग के नाम पर दर्ज कर दी गई है।

उनके मुताबिक, यह जमीन आसपास की 8 से 10 ग्राम पंचायतों के गोवंश और अन्य मवेशियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक चरागाह है। गांव के निस्तार पत्रक में भी भूमि को चरागाह के रूप में दर्ज किए जाने का उन्होंने दावा किया।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को दामाखेड़ा में दिए गए अपने आश्वासन और सार्वजनिक उपयोग की भूमि से जुड़े न्यायालयीन निर्देशों के संदर्भ में पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने राजस्व मंत्री से भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि उनके गृह जिले से जुड़े इस मामले में सरकार की क्या स्थिति है और चरागाह भूमि को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

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