RBI MPC Meeting 2026 : रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कोई बदलाव नहीं
महंगाई और पश्चिम एशिया संकट पर जताई चिंता

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार तीसरी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ (Neutral) बनाए रखा है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के कारण आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन केंद्रीय बैंक के अनुमान से बेहतर रहा है।
पश्चिम एशिया संकट और महंगाई पर चिंता
आरबीआई ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अल-नीनो से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। गवर्नर ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार पर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि निकट भविष्य में कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ा, महंगाई का अनुमान घटा
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
गवर्नर ने कहा कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है और ऋण वृद्धि भी मजबूत बनी हुई है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहेगी।
रुपये पर बना हुआ है दबाव
आरबीआई ने कहा कि महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये के बीच कारोबार कर रहा है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है, जबकि फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े तनाव बढ़ने के बाद इसमें लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आरबीआई का मानना है कि वैश्विक व्यापार में नरमी और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव चालू खाता घाटे के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।



