छत्तीसगढ़

ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं का प्राचार्य पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ

बिलासपुर, 6 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य शासन द्वारा तय किए गए प्राचार्य पदोन्नति नियमों और कैडर मापदंडों को वैध ठहराते हुए शिक्षक नारायण प्रकाश तिवारी की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले से ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं की प्राचार्य पद पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

इससे पहले, याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने 5 अगस्त 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था। अब सिंगल बेंच ने राज्य शासन के पक्ष में निर्णय देते हुए कहा कि 65% ई संवर्ग, 25% लोकल बॉडी संवर्ग और 10% सीधी भर्ती का कोटा पूरी तरह से उचित है।

डिवीजन बेंच की जस्टिस रजनी दुबे और अमितेंद्र कुमार प्रसाद की पीठ ने पहले ही सरकार के नियमों को सही माना था। कोर्ट ने कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 और प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को जारी प्राचार्य पदोन्नति सूची पर लगी रोक हटा दी है।

राज्य सरकार ने अप्रैल में 2,813 व्याख्याताओं की पदोन्नति सूची जारी की थी, जिसे लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि प्राचार्य पद प्रशासनिक है, इसलिए केवल बीएड डिग्रीधारकों को ही पात्र माना जाए और डीएलएड धारकों को अयोग्य घोषित किया जाए। वहीं, हस्तक्षेप याचिका में तर्क दिया गया कि आदिवासी और पंचायत विभाग से संविलियन किए गए शिक्षक भी पदोन्नति के पात्र हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पहले से जारी डिवीजन बेंच के आदेशों में नियमों की वैधता स्पष्ट की जा चुकी है। इस आधार पर सिंगल बेंच ने भी राज्य शासन के पक्ष में फैसला सुनाया।

अब शिक्षा विभाग को टी और ई संवर्ग दोनों के व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति और पदस्थापना देने की छूट मिल गई है। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटका प्राचार्य पदोन्नति विवाद खत्म हो गया है और शिक्षकों में राहत की लहर है।

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