धर्म-आध्यात्म

चैत्र नवरात्रि 2026: अष्टमी-नवमी पर कब और कैसे करें कन्या पूजन, जानें पूरा महत्व

-पंडित यशवर्धन पुरोहित

पंचांग के अनुसार 19 मार्च से प्रारंभ चैत्र नवरात्रि 27 मार्च को समाप्त होगी। शक्ति के साधक इन 9 दिनों में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों का आशीर्वाद पाने के लिए पूरे विधि-विधान से पूजा, जप, तप और व्रत करते हैं। शक्ति साधना के अंतिम दो दिन अष्टमी और नवमी तिथि को बेहद खास माना गया है क्योंकि इन दो दिनों में देवी का दिव्य स्वरूप मानी जाने वाली कन्याओं का पूजन होता है।

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार नवरात्रि के अंतिम दो दिन अष्टमी और नवमी पर देवी के स्वरूप मानी जाने वाली कन्याओं की पूजा की जाती है।

कब करें कन्या पूजन
पंडित यशवर्धन पुरोहित के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे तक कन्या पूजन करना शुभ रहेगा। वहीं नवमी तिथि 26 मार्च सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार इन तिथियों में पूजन कर सकते हैं।

किस उम्र की कन्या का क्या महत्व
मान्यताओं के अनुसार 2 से 10 वर्ष तक की कन्याएं देवी का स्वरूप मानी जाती हैं। नवरात्रि में 2 से 10 साल की कन्या की पूजा का विधान है। 2 वर्ष की कन्या कुमारी, 3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या कालिका, 7 वर्ष की कन्या शाम्भवी, 8 वर्ष की कन्या दुर्गा, 9 वर्ष की कन्या चंडिका और 10 वर्ष की कन्या को सुभद्रा कहते हैं।

कैसे करें कन्या पूजन
कन्या पूजन के लिए अष्टमी या नवमी के दिन स्नान के बाद विधि-विधान से देवी की पूजा करें। इसके बाद 9 कन्याओं और एक बालक (भैरव रूप) को घर बुलाएं। उनके चरण धोकर रोली-अक्षत से तिलक करें, मौली बांधें और चुनरी अर्पित करें।

इसके पश्चात उन्हें पूरी, चना, हलवा, खीर और फल का प्रसाद खिलाएं। अंत में वस्त्र, उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि से किया गया कन्या पूजन देवी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।

किस कन्या की पूजा से कौन सा मिलता है आशीर्वाद?
2 वर्ष की कन्या पूजा का फल: मान्यता के अनुसार 2 साल की कन्या जिसे कुमारी कहा जाता है, उसकी विधि-विधान से पूजा करने पर साधक का दु:ख-दारिद्रय दूर हो जाता है और उसे सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

3 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में पूजी जाने वाली 3 साल की कन्या को त्रिमूर्ति कहा जाता है, जिसकी पूजा करने पर देवी स्वरूपा उस कन्या से धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

4 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि के पर्व में 4 साल की पूजी जाने वाली कन्या कल्याणी कहलाती है, जिसकी पूजा करने पर साधक को परिवार और पूरे कुल का कल्याण होता है। उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

5 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में पूजी जाने वाली 5 साल की कन्या रोहिणी कहलाती है, जो कि साधक को सौभाग्य के साथ आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करती है। देवी स्वरूपा रोहिणी के आशीर्वाद से साधक निरोगी रहता है।

6 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में पूजी जाने वाली 6 साल की कन्या साक्षात कालिका देवी का स्वरूप होती है। मान्यता के अनुसार 6 वर्ष की कन्या को पूजने पर साधक को बुद्धि, विद्या और विवेक की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के आशीर्वार और इन तीनों के बल पर वह सभी क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है।

7 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में पूजी जाने वाली 7 साल की कन्या चंडिका के समान होती है जो साधक को ऐश्वर्य और शक्ति से संपन्न करती है।

8 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में 8 वर्ष की कन्या शांभवी कहलाती है, जिनकी पूजा करने पर साधक को कोर्ट-कचहरी से लेकर सभी प्रकार के वाद-विवाद में सफलता प्राप्त होती है।

9 वर्ष की कन्या पूजा का फल: शक्ति पूजा के महापर्व नवरात्रि में 9 वर्ष की कन्या साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानी गई है, जिसकी पूजा करने पर साधक अपने सभी शत्रुओं पर विजय पाते हुए अपने सभी सोचे हुए कार्यों में मनचाही सफलता प्राप्त करता है। देवी कृपा से उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

10 वर्ष की कन्या पूजा का फल: नवरात्रि में पूजी जाने वाली 10 वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। देवी का यह दिव्य स्वरूप सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाला माना गया है। मान्यता है कि 10 वर्ष की कन्या के आशीर्वाद से साधक की समस्त कामनाएं पूर्ण होती हैं।

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