रात की बढ़ती गर्मी बनी नया खतरा, विशेषज्ञ ने दी चेतावनी: लंबी रणनीति की जरूरत

नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2026। देश में बढ़ती गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि रातें भी तेजी से अधिक गर्म होती जा रही हैं। डॉ. विश्वास चितले, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर ने इस गंभीर स्थिति को लेकर चेतावनी दी है।
डॉ. चितले के अनुसार, हालिया शोध से यह सामने आया है कि अत्यधिक गर्म दिनों के मुकाबले बेहद गर्म रातों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, क्योंकि शरीर को रात के समय भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। इससे हीट स्ट्रेस और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों में इजाफा हो रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत की 75 प्रतिशत से अधिक आबादी ऐसे जिलों में रहती है, जहां गर्मी का खतरा अधिक है। ऐसे में केवल आपातकालीन उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि दीर्घकालिक और संरचनात्मक समाधान अपनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने ‘हीट एक्शन प्लान’ को और मजबूत बनाने पर जोर दिया है। इसके तहत जोखिम-आधारित योजना, बढ़ती आर्द्रता और शहरी ‘हीट आइलैंड’ जैसे स्थानीय कारकों को ध्यान में रखना जरूरी बताया गया है। साथ ही, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए ‘कूल रूफ’, नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर और पैरामीट्रिक बीमा जैसे उपायों को मुख्यधारा में लाने की सलाह दी गई है।
डॉ. चितले ने यह भी कहा कि जलवायु डेटा और शहरी बुनियादी ढांचे के बेहतर समन्वय से ही इस “अदृश्य आपदा” से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। इससे न केवल जनस्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि आर्थिक उत्पादकता को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।



