छत्तीसगढ़

तेंदूपत्ता अग्निकांड: डीएफओ हटे… अब बाकी जिम्मेदारों पर कब गिरेगी गाज?

बीजापुर, 29 मई 2026। बीजापुर जिले के ईटपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस आगजनी में करीब 25 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता जलकर राख हो गए, जिससे लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बीजापुर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश जांगड़े को पद से हटा दिया है, लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित रहेगी या बाकी जिम्मेदारों पर भी गाज गिरेगी।

लघुवनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष ने किया निरिक्षण
घटना के बाद छत्तीसगढ़ राज्य लघुवनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम शुक्रवार को अचानक बीजापुर पहुंचे। उन्होंने ईटपाल गोदाम का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से जानकारी ली। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मामले की विभागीय और पुलिस जांच जारी है तथा जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह विभाग का अधिकारी-कर्मचारी हो या कोई बाहरी व्यक्ति।

सवालों के घेरे में वन विभाग की कार्यप्रणाली
इस अग्निकांड के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। जिस समय गोदाम में तेंदूपत्ता की उठाई-ढुलाई का कार्य चल रहा था, उस दौरान जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे, इसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदाम में आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसकी वजह से आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और करोड़ों का नुकसान हो गया।

राजनीतिक संरक्षण तलाश रहे जिम्मेदार
सूत्रों के मुताबिक, मामले में संलिप्त बताए जा रहे कुछ निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी अब कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक संरक्षण तलाशते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई लोग भाजपा नेताओं और सर्किट हाउस के चक्कर काट रहे हैं ताकि उन पर कार्रवाई न हो।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार केवल डीएफओ को हटाकर मामला शांत करती है या फिर गोदाम प्रभारी, रेंज अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाती है।

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