PMGSY विवाद: खबर छपते ही पत्रकारों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश!

“PMGSY सड़क निर्माण में अवैध उत्खनन के आरोपों के बीच अब पत्रकारों को बदनाम करने और उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश के आरोपों ने मामले को और विवादित बना दिया है…”
बीजापुर, 9 जून 2026। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत तराईपारा से तुमनार तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर नया विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के लिए वन एवं राजस्व भूमि से बिना वैध अनुमति मिट्टी और मुरुम का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि सुकमा की एक निर्माण कंपनी नियमों और आवश्यक प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि उत्खनन के लिए जरूरी अनुमति, रॉयल्टी और अन्य वैधानिक दस्तावेजों का पालन नहीं किया जा रहा है। इस मामले को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
स्थानीय पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि खबरें प्रकाशित होने के बाद निर्माण कंपनी से जुड़े कुछ लोगों द्वारा ग्रामीणों के बीच उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। पत्रकारों का दावा है कि यह प्रचार किया जा रहा है कि वे सड़क निर्माण कार्य रुकवाना चाहते हैं और ठेकेदार से धन की मांग कर रहे हैं। पत्रकारों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है।
पत्रकारों का कहना है कि अवैध उत्खनन और निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों को उजागर करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में पहले भी पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं का हवाला देते हुए सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
जानकारी के मुताबिक, संबंधित ठेकेदार पर पहले भी एक पत्रकार की निजी भूमि पर बिना अनुमति सड़क निर्माण कराने के आरोप लग चुके हैं। उस दौरान भी विरोध करने पर ग्रामीणों को पत्रकार के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई थी।
मामले को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्माण कार्य और उत्खनन से जुड़े सभी दस्तावेज और अनुमति मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। वन विभाग और राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के बीच संतुलन बना रहे।



