हाईकोर्ट की दो टूक: पसंदीदा पोस्टिंग का नहीं अधिकार, युक्तिकरण के तहत तबादले वैध

बिलासपुर, 19 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की युक्तिकरण नीति के तहत किए गए व्याख्याताओं के तबादलों को वैध ठहराते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को अपनी पसंद के जिले या स्थान पर पदस्थ रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने दो महिला व्याख्याताओं की रिट अपील खारिज कर दी।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिवनी से जुड़ा है। वाणिज्य विषय की व्याख्याता शकुंतला राठौर और कृष्णा देवी साहू को युक्तिकरण नीति के तहत अतिशेष घोषित कर मुंगेली जिले के अलग-अलग स्कूलों में स्थानांतरित किया गया था। दोनों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दावा किया था कि जिले के अन्य स्कूलों में रिक्त पद होने के बावजूद उन्हें काउंसलिंग में विकल्प नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उनकी शिकायतों पर उचित विचार नहीं किया गया और कई स्कूलों में एक स्वीकृत पद पर दो-दो वाणिज्य व्याख्याता पदस्थ हैं। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि संबंधित स्कूल में वाणिज्य विषय का एक भी छात्र नामांकित नहीं था, इसलिए शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा गया जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि शैक्षणिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग प्रशासन का अधिकार है। जब किसी स्कूल में संबंधित विषय के छात्र ही नहीं हैं, तब शिक्षकों को जरूरत वाले संस्थानों में भेजना पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि तबादला और युक्तिकरण प्रशासनिक निर्णय हैं, जिनमें न्यायालय केवल प्रक्रिया की वैधता की जांच कर सकता है, न कि प्रशासनिक विवेक में हस्तक्षेप।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को भी अस्पष्ट बताया, क्योंकि उन्होंने उन स्कूलों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया जहां एक पद पर दो शिक्षकों के कार्यरत होने का दावा किया गया था। इसके साथ ही दोनों व्याख्याताओं की अपील खारिज कर दी गई।



