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नए लेबर कोड से खुलेगा 77 लाख नई नौकरियों का रास्ता, घटेगी बेरोजगारी

नई दिल्ली, 25 नवंबर 2025। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में लागू होने वाले नए लेबर कोड मीडियम टर्म में रोजगार के अवसरों को मजबूत करेंगे और बेरोजगारी को करीब 1.3 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रभाव सुधारों के सही ढंग से लागू होने, कंपनियों की लागत समायोजन क्षमता और राज्यों के पूरक नियमों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल देश में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1 प्रतिशत है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में औसत वर्किंग एज पॉपुलेशन 70.7 प्रतिशत है। ऐसे में रिपोर्ट का अनुमान है कि नए कोड के लागू होने से लगभग 77 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा हो सकते हैं।

खपत में 75 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का अनुमान
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा कि लगभग 30 प्रतिशत सेविंग रेट को देखते हुए नए नियम लागू होने के बाद प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 66 रुपए की अतिरिक्त खपत बढ़ सकती है। इससे कुल मिलाकर 75 हजार करोड़ रुपए का उपभोग बढ़ेगा। उनका कहना है कि लेबर कोड उपभोग बढ़ाने में एक खास भूमिका निभाएंगे।

फॉर्मलाइजेशन की रफ्तार तेज होगी
रिपोर्ट के मुताबिक, नए कोड से कर्मचारी और उद्यम दोनों मजबूत होंगे। इससे भारत का वर्कफोर्स अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल देश में 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं।

अगर असंगठित क्षेत्र के 20 प्रतिशत लोग फॉर्मल पे रोल में शामिल होते हैं तो लगभग 10 करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ अगले दो से तीन साल में सोशल सिक्योरिटी कवरेज 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

फॉर्मल वर्कफोर्स में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव
पीएलएफएस डेटा के आधार पर भारत में फिलहाल फॉर्मल वर्कफोर्स की हिस्सेदारी 60.4 प्रतिशत है। रिपोर्ट का अनुमान है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद फॉर्मलाइजेशन रेट 15.1 प्रतिशत बढ़ेगा, जिससे कुल फॉर्मल वर्कफोर्स 75.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

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