रायपुर में 100 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने शुरू किया गिरनार नेमी तप
मुनि संवेगरत्न सागर ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग

रायपुर, 8 अगस्त 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान तप, त्याग और साधना का क्रम लगातार जारी है। इसी श्रृंखला में 7 अगस्त से 22 दिवसीय गिरनार नेमी तप की शुरुआत हुई। मुनि संवेगरत्न सागर के सानिध्य में 100 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने इस तप का संकल्प ग्रहण किया।
गिरनार नेमी तप के दौरान एक दिन उपवास और अगले दिन व्यासना का क्रम रहेगा। तप में कुल 9 उपवास और 9 व्यासना के बाद अंतिम चरण में एक तेला यानी लगातार तीन उपवास किए जाएंगे। इसके बाद तप का पारणा होगा।
राग से विराग की ओर ले जाता है गिरनार नेमी तप
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि गिरनार नेमी तप व्यक्ति को राग से विराग और संसार से मुक्ति की ओर ले जाने वाला साधना का मार्ग है। उन्होंने कहा कि संसार का राग और स्वार्थ व्यक्ति को मोह-माया में बांधे रखते हैं। इस तप के माध्यम से राग और स्वार्थ से पीछे हटने का अभ्यास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति अक्सर यह मानता है कि संसार में कोई किसी के बिना नहीं रह सकता, लेकिन वास्तविकता अलग है। समय के साथ हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में लौट आता है। इसलिए संसार के मोह में उलझने के बजाय आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
जिज्ञासा से आता है सीखने का भाव
मुनि श्री ने कहा कि जिन शासन में देव, गुरु और धर्म का सानिध्य मिलना सौभाग्य की बात है। केवल प्रवचन सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन में जिज्ञासा का भाव होना भी जरूरी है। जिज्ञासा से सीखने की प्रवृत्ति विकसित होती है और सीखी हुई बातों को जीवन में उतारने से व्यक्ति आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ता है।
ब्रह्मचर्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रह्म अर्थात आत्मा और चर्य अर्थात उसमें रहना। जो व्यक्ति आत्मा से जुड़कर जीवन जीता है, वही वास्तविक अर्थों में ब्रह्मचर्य की ओर बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आत्मा से जुड़ने की साधना के उद्देश्य से ही गिरनार नेमी तप किया जा रहा है।
100 से अधिक तपस्वियों का विजय तिलक से सम्मान
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि प्रवचन के बाद मुनि संवेगरत्न सागर के सानिध्य में गिरनार नेमी तप की विधि शुरू हुई। लाभार्थी परिवार ने भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा विराजमान कराई और तप कल्याणक कलश की स्थापना की।
इस अवसर पर 100 से अधिक तपस्वियों ने तप का संकल्प लिया। लाभार्थी परिवार की ओर से सभी तपस्वियों का विजय तिलक और माला पहनाकर सम्मान किया गया। श्रीफल, अक्षत और रोकड़ से तपस्वियों का बहुमान भी किया गया।
45 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं कर रहे पंच परमेष्ठी श्रेणी तप
ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में पंच परमेष्ठी श्रेणी तप भी जारी है, जिसमें 45 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं शामिल हैं। 49 दिवसीय इस तप की दूसरी श्रेणी में 7 अगस्त को दूसरा उपवास रहा, जबकि 8 अगस्त को व्यासना का क्रम रहेगा।
सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं जिनवाणी का श्रवण कर रहे हैं और तप, साधना एवं धर्म के माध्यम से आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



