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देव-शास्त्र-गुरु पर अटूट विश्वास से दूर होते हैं पाप कर्म: मुनि आगम सागर

रायपुर, 9 अगस्त 2026। दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत रविवार, 9 अगस्त को दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में धार्मिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर पद्म प्रभु जिनालय लाभांडी जैन समाज के सदस्य एवं पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुनि संघ के सान्निध्य में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, आहारचर्या, धार्मिक कक्षाएं और स्वाध्याय सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए।

समयोपदेश वर्षायोग समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा का लाभ विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने लिया। इसके बाद मंगलाचरण के बीच मुनि आगम सागर महाराज एवं ससंघ को समाज के सदस्यों द्वारा आहारचर्या कराई गई।

तत्त्वार्थ सूत्र और छः ढाला का हुआ स्वाध्याय

आहारचर्या के बाद मुनि संघ के सान्निध्य में धार्मिक कक्षाएं और स्वाध्याय आयोजित किया गया। मुनि पुनीत सागर महाराज ने तत्त्वार्थ सूत्र के दूसरे अध्याय का अध्ययन कराया। वहीं मुनि आगम सागर महाराज ने छः ढाला ग्रंथ के दूसरे अध्याय का वाचन करते हुए धर्म और कर्मों के स्वरूप पर विस्तार से प्रवचन दिया।

पाप कर्मों के परिणामों से कराया अवगत

मुनि आगम सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में नरक गति, पापकर्मों के परिणाम और जीवन में सच्चे धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंसा, झूठ, कुदृष्टि और देव-शास्त्र-गुरु की निंदा जैसे कर्म जीव को दुर्गति की ओर ले जाते हैं।

मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए। पूर्व भवों में अनेक प्रकार के दुखों को सहन करने के बाद दुर्लभ मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है, इसलिए इस जीवन को पापकर्मों में नहीं गंवाना चाहिए।

वीतराग देव पर रखें अटूट विश्वास

मुनि आगम सागर महाराज ने कहा कि धर्म के मार्ग पर संशय और मिथ्यात्व से बचना जरूरी है। रागी जीवों के बजाय वीतरागी और सर्वज्ञ भगवान पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीतराग देव, शास्त्र और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा तथा धर्म के मार्ग पर आचरण व्यक्ति को पापकर्मों और दुर्गतियों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने दिगम्बर संतों और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु की शरण में रहने तथा धर्म के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में सही दिशा के लिए ज्ञान, श्रद्धा और संयम को अपनाना आवश्यक है।

प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने जैन दर्शन में वर्णित नरक गतियों के स्वरूप और वहां जीवों को मिलने वाले कष्टों का वर्णन करते हुए श्रोताओं को पापकर्मों से दूर रहने की प्रेरणा दी।

समापन पर मुनि संघ के सान्निध्य में धर्मसभा संपन्न हुई। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की सहभागिता रही। मुनि संघ का सान्निध्य और धार्मिक स्वाध्याय रायपुर जैन समाज के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बना रहा।

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