छत्तीसगढ़

बड़ा मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व, मुनिराज के ओजस्वी वचनों ने किया मुग्ध

रायपुर, 21 जुलाई 2026। आषाढ़ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में अष्टान्हिका महापर्व का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, संतों की आहारचर्या और धर्मसभा के साथ पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण देखने को मिला।

प्रातः 8 बजे मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक एवं भव्य शांतिधारा आयोजित की गई। शांतिधारा का सौभाग्य विजय कुमार नायक, अजय कुमार नायक और संजय कुमार नायक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। परम पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से शांतिधारा कर्ता परिवार का मंगल उच्चारण किया।

संतों की आहारचर्या में श्रद्धालुओं ने लिया पुण्य लाभ

कार्यक्रम के बाद नगर में विराजमान संतों की नवधा भक्ति पूर्वक आहारचर्या कराई गई। मुनि आगम सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य बंशीलाल जैन परिवार, मुनि पुनीत सागर महाराज को आदिनाथ महिला मंडल, धैर्य सागर महाराज को अनुराग जैन परिवार तथा स्वागत सागर महाराज को विजय, अजय एवं संजय नायक जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

‘पूर्ण श्रद्धा ही मोक्ष का मार्ग’ : मुनि आगम सागर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आगम सागर ने कहा कि देव-शास्त्र-गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा ही सम्यक दर्शन है। श्रद्धा में कमी होने पर साधक को पूर्ण फल नहीं मिलता, जबकि सच्ची आस्था मोक्ष और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने कहा कि जिनेंद्र भगवान के दरबार में सांसारिक इच्छाएं लेकर नहीं, बल्कि निष्काम भक्ति के भाव से जाना चाहिए। “जो बिना किसी स्वार्थ के भगवान की आराधना करता है, उसे उसकी कल्पना से भी अधिक प्राप्त होता है।”

आहारदान का बताया महत्व

मुनि श्री ने प्रवचन में आहारदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी सामर्थ्य और ईमानदार कमाई से किया गया दान ही श्रेष्ठ होता है। मुनिराज समता भाव से सभी के घर आहारचर्या के लिए जाते हैं और उनका आहारदान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सच्चे भाव से किया गया आहारदान अनंत पुण्य का कारण बनता है और शुद्ध भाव ही धर्म साधना की वास्तविक शक्ति है।

कार्यक्रम में नवोदय वर्षायोग समिति-2026, बड़ा मंदिर ट्रस्ट, कार्यकारिणी के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अष्टान्हिका महापर्व के शुभारंभ के साथ ही बड़ा मंदिर में आगामी दिनों तक विविध धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।

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