राज्य में 1.10 लाख पेड़ों की कटाई को मंजूरी, 50 करोड़ की वन संपदा प्रभावित

रायपुर, 31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में 1 लाख 10 हजार 663 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। इन पेड़ों का अनुमानित मूल्य 50 करोड़ 60 लाख 96 हजार 26 रुपये बताया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनमें से 85 हजार 413 पेड़ों की कटाई पहले ही पूरी की जा चुकी है।
वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से 16 जून 2026 के बीच 20 विकास परियोजनाओं के लिए 793.589 हेक्टेयर वन भूमि में वृक्ष कटाई की स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें सरगुजा संभाग के 3 और बस्तर संभाग के 7 वनमंडल, यानी कुल 10 वनमंडल शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि यह अनुमति सड़क, अधोसंरचना और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए दी गई है। हालांकि, वन संपदा से समृद्ध सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण और आदिवासी हितों पर सवाल उठने लगे हैं।
इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास के नाम पर लोगों की सांसें छीनी जा रही हैं। उनका आरोप है कि छत्तीसगढ़ के जंगल पूरे देश को ऑक्सीजन देने का काम करते हैं और सरकार लगातार पेड़ों की कटाई की अनुमति दे रही है। उन्होंने हसदेव क्षेत्र में पहले करीब चार लाख पेड़ों की कटाई की अनुमति का भी उल्लेख करते हुए इसे चिंताजनक बताया।
वहीं छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन समेत कई सामाजिक संगठनों ने भी बड़े पैमाने पर हो रही वृक्ष कटाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की आजीविका, संस्कृति और अस्तित्व का भी सवाल है।
राज्य में एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधोसंरचना विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ वन संरक्षण और प्रभावित समुदायों के हितों का भी समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।



