अंतराष्ट्रीय

अमेरिका-ईरान में शांति समझौता, युद्धविराम पर मुहर

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। दोनों देशों ने समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे पर सहमति जताते हुए हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते में सैन्य गतिविधियों की समाप्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग और परमाणु कार्यक्रम की निगरानी जैसे कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार शाम वर्साय पैलेस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर चुके थे।

ईरान ने भी की पुष्टि

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी इरना से कहा कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है। अब इसकी सबसे बड़ी परीक्षा क्रियान्वयन होगी। हालांकि समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी।

सैन्य टकराव खत्म करने पर जोर

समझौते के मसौदे के मुताबिक अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों द्वारा सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे और बल प्रयोग या उसकी धमकी से बचेंगे। साथ ही एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर भी सहमति बनी है।

समुद्री मार्ग और सैन्य उपस्थिति पर फैसला

समझौते के तहत अमेरिका ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा और 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह समाप्त करेगा। वहीं ईरान अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी भी कम करेगा।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की विकास योजना

अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेंगे। इसके साथ ही अमेरिका ईरान पर लगाए गए विभिन्न आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।

परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी

समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में नष्ट किया जाएगा। अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार नहीं करेगा, जबकि अमेरिका नए प्रतिबंध लगाने या अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने से परहेज करेगा।

जब्त संपत्तियां लौटाएगा अमेरिका

मसौदे के अनुसार अमेरिका ईरान की रोकी गई या जब्त की गई संपत्तियों और फंड को वापस करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं में आवश्यक छूट भी प्रदान की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में होगा अंतिम समझौता

दोनों देशों ने समझौते के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए समर्थन देने की योजना भी शामिल है।

इस समझौते को पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देश समझौते के प्रावधानों को किस तरह लागू करते हैं और क्या यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर पाएगी।

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