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GST Council Meeting: लग्जरी ई-कार और परिधानों पर बढ़ सकता है टैक्स…

नई दिल्ली, 03 सितंबर 2025। जीएसटी परिषद की बुधवार और बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक को कर सुधारों की अगली पीढ़ी की शुरुआत माना जा रहा है। बैठक में कर ढांचे को सरल बनाने और अनुपालन बोझ कम करने पर चर्चा होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी 2.0 से छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को बड़ी राहत मिलेगी और पारदर्शी अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने बनाई टास्क फोर्स
तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स नियमों को सरल करने और अनुपालन लागत घटाने पर फोकस करेगी। साथ ही एमएसएमई और स्टार्टअप्स को ज्यादा सक्षम समर्थन तंत्र देने पर भी जोर दिया गया है।

महंगी ई-कारों पर बढ़ सकता है टैक्स
बैठक में लग्जरी और महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर जीएसटी दरें बढ़ाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।

20 से 40 लाख रुपये कीमत वाली ई-कारें : टैक्स 5% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव।
40 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली ई-कारें : 28% जीएसटी लागू करने का सुझाव।

इससे टेस्ला, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज और बीवाईडी जैसी कंपनियों को झटका लग सकता है। प्रस्ताव के पीछे तर्क है कि ये वाहन आयातित और उच्च वर्ग के लिए हैं।

घरेलू कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा पर असर सीमित रहेगा, क्योंकि इनके ई-वाहनों की कीमत 20 लाख से कम है।

राज्यों को होगा बड़ा फायदा
नई कर व्यवस्था से राज्यों को भी लाभ मिलेगा। अनुमान है कि मार्च 2026 तक राज्यों को कम-से-कम 10 लाख करोड़ रुपये राज्य जीएसटी के रूप में और 4.1 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर के जरिए प्राप्त होंगे।

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कर हस्तांतरण व्यवस्था के चलते जीएसटी राजस्व का लगभग 70% हिस्सा राज्यों के पास जाता है।

परिधानों पर भी टैक्स बढ़ने की संभावना
परिषद 2,500 रुपये से अधिक कीमत वाले परिधानों पर जीएसटी 12% से बढ़ाकर 18% करने पर भी विचार कर रही है।

भारतीय वस्त्र निर्माता संघ (CMAI) ने इसका विरोध किया है और कहा है कि यह कदम संगठित उद्योग और मध्य वर्गीय उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा। ऊनी परिधानों की कीमतें 3,500 से 7,000 रुपये तक होती हैं, जिन पर अतिरिक्त टैक्स से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा। संघ ने इसे “मध्य वर्ग और पहले से संकटग्रस्त उद्योग पर दोहरी मार” बताया।

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