छत्तीसगढ़

न्यायधानी में छत्तीसगढ़ी भाषा का उत्सव: नौवें प्रांतीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

बिलासपुर, 11 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति का महाकुंभ शनिवार को न्यायधानी बिलासपुर में सजा, जब छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के तत्वावधान में नौवें प्रांतीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ सिम्स ऑडिटोरियम में हुआ। दूसरी बार इस राज्य स्तरीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा बिलासपुर पूरे दिन छत्तीसगढ़ी अस्मिता और साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

सम्मेलन का उद्घाटन छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस मौके पर विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी और जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने आयोग की गतिविधियों और सम्मेलन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल पाली और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरनी के विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने लोक संस्कृति की जीवंत छटा बिखेर दी। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों और सामाजिक भूमिका पर चर्चा करते हुए इसे जनभाषा से राजभाषा तक के सफर का प्रतीक बताया।

साहित्यकारों का सम्मान, नई कृतियों का विमोचन
सम्मेलन के प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ी साहित्य को समर्पित पांच वरिष्ठ साहित्यकारों—वंशीधर लाल, डॉ. विजय सिन्हा, डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, डॉ. डी.पी. देशमुख और मोहन लाल डहरिया—को उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसी सत्र में छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध करने वाली 13 नई पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें कविता, गद्य, छंद और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कृतियां शामिल रहीं।

भाषा, परंपरा और डिजिटल दौर पर मंथन
अकादमिक सत्रों में ‘पुरखा के सुरता’, ‘छत्तीसगढ़ी भाषा की महत्ता’, ‘सोशल मीडिया में छत्तीसगढ़ी’ और ‘छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य’ जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। विद्वानों ने भाषा के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक माध्यमों में उसकी बढ़ती भूमिका पर भी विचार रखे।

कवि सम्मेलन बना आकर्षण
प्रथम दिवस का समापन विशाल कवि सम्मेलन के साथ हुआ, जिसमें 250 से अधिक कवियों ने पंजीयन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। कविताओं, गीतों और छंदों से पूरा सभागार देर रात तक गूंजता रहा। सम्मेलन का संचालन और संयोजन अनुभवी साहित्यकारों द्वारा किया गया।

आयोजन संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के मार्गदर्शन और छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के निर्देशन में बिलासपुर इकाई द्वारा किया जा रहा है। वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान, नई पुस्तकों का विमोचन और रिकॉर्ड कवि सहभागिता ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान सभागार “जय छत्तीसगढ़, जय छत्तीसगढ़ी” के उद्घोष से गूंजता रहा।

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