छत्तीसगढ़

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त गौरव ग्रंथ का विमोचन, राष्ट्रीय विमर्श पर हुआ मंथन

“प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी और गहोई वैश्य समाज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त गौरव ग्रंथ के विमोचन एवं विमर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और विद्वानों ने राष्ट्रकवि के साहित्य, राष्ट्रीय चिंतन और हिंदी भाषा में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की”

बिलासपुर, 18 मई 2026। बिलासपुर के शासकीय जेपी वर्मा कला एवं वाणिज्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय सभागार में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त गौरव ग्रंथ के विमोचन एवं विमर्श का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी और गहोई वैश्य समाज बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति डॉ. चन्द्र भूषण वाजपेई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं थावे विद्यापीठ गोपालगंज के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने अध्यक्षता की। विशेष अतिथि के रूप में मनोहर लाल बरसैंया, डॉ. श्याम लाल निराला, लक्ष्मी नारायण बिलैया और डॉ. आर.के. गांधी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति डॉ. चन्द्र भूषण वाजपेई ने कहा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने हिंदी की खड़ी बोली को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने राष्ट्रीय विमर्श की जो आधारशिला रखी, उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में गौरव ग्रंथ के संपादक मनोहर लाल बरसैंया ने ग्रंथ की संकल्पना और निर्माण यात्रा पर प्रकाश डाला। डॉ. श्याम लाल निराला ने ग्रंथ को राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज बताया।

आयोजन की शुरुआत सरस्वती एवं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। डॉ. किरण राठौर ने सरस्वती वंदना और राष्ट्रकवि के गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में राष्ट्रकवि की पुस्तकों की प्रदर्शनी और विक्रय भी आकर्षण का केंद्र रही।

इस अवसर पर राधवेंद्र दुबे, डॉ रमेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉक्टर बजरंगबली शर्मा और विष्णु कुमार तिवारी उपस्थित थे। इनके अलावा गहोई वैश्य समाज से डॉक्टर वी के नगरिया, सचिव अमित सेठ, शिव कुमार मोतले, राजकुमार बरसैंया, संजीव बहरे एवं समाज की उपाध्यक्षा श्रीमती रश्मि बिलैया और मनीष बरसैंया, बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार और विद्वतजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य और गरिमामय स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनोद कुमार गुप्त ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन राजकुमार बरसैंया ने किया।

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