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मन को जीतना ही मोक्ष की पहली सीढ़ी : मुनि संवेगरत्न सागर

रायपुर, 31 जुलाई 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में आयोजित सर्वमंगलमय वर्षावास-2026 की चातुर्मासिक प्रवचनमाला में गुरुवार को मुनि संवेगरत्न सागर ने श्रद्धालुओं को मन पर नियंत्रण रखने और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना मन है, इसलिए आत्मकल्याण और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मन पर विजय पाना आवश्यक है।

मुनिश्री ने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति अपनी धन-संपत्ति की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहता है, उसी प्रकार आत्मरूपी तत्व की भी निरंतर रक्षा और निगरानी करनी चाहिए। शुभ संस्कारों और धर्ममय जीवन से ही शुभ चिंतन, शुभ ज्ञान और धर्म-ध्यान की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि धर्म-ध्यान मनुष्य को आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है। धर्मसभा में बैठकर जिनवाणी का श्रवण करना तभी सार्थक है, जब उसके उपदेशों को जीवन में भी उतारा जाए। यदि प्रवचन सुनने के बाद मन फिर सांसारिक मोह-माया और इच्छाओं में उलझ जाता है, तो साधक अपने लक्ष्य से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि मन की इच्छाओं की खाई कभी नहीं भरती और यही मनुष्य को मोक्ष मार्ग से दूर कर देती है।

मुनिश्री ने कहा कि वर्षों तक जिनवाणी सुनने के बावजूद यदि उसका आचरण जीवन में नहीं दिखाई देता, तो मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने शास्त्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “नजरें बदलना आसान है, लेकिन नजरिया बदलना कठिन है।” इसलिए साधक को अपने लक्ष्य पर अडिग रहना चाहिए।

उन्होंने वर्षावास को आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर बताते हुए कहा कि मन को जो अच्छा लगे, वह करने के बजाय जो आत्महितकारी और कल्याणकारी हो, वही करना चाहिए। प्रभु के वचनों का अनुसरण करते हुए मनुष्य शुभ चिंतन, भावना, ध्यान और अनुप्रेक्षा की ओर अग्रसर होता है।

सच्चा सुख केवल धर्म में है : मुनि शाश्वतरत्न सागर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि शाश्वतरत्न सागर ने कहा कि मनुष्य जीवनभर सांसारिक सुख की तलाश करता रहता है, जबकि परमात्मा ने स्पष्ट कहा है कि यह संसार मूलतः दुःखमय है। वास्तविक और स्थायी सुख केवल धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने से ही प्राप्त हो सकता है।

उन्होंने कहा कि दृष्टिकोण के आधार पर मनुष्यों को चार प्रकारों में बांटा जा सकता है। कुछ लोग सांसारिक सुख को ही वास्तविक मानते हैं, कुछ परमात्मा के बताए मार्ग को स्वीकार तो करते हैं लेकिन व्यवहार में संसार को प्राथमिकता देते हैं। कुछ लोग धर्ममार्ग को पूरी तरह छोड़ देते हैं, जबकि कुछ उसे सही मानते हुए भी जीवन में उतारने का प्रयास नहीं करते। मुनिश्री ने कहा कि धर्म को केवल स्वीकार करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना ही वास्तविक साधना है।

31 जुलाई को होगा सूत्र बोहराने का आयोजन

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लूणिया और महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय, विवेकानंद नगर में प्रतिदिन सुबह 8:45 बजे नियमित प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। 31 जुलाई को गुरु भगवंत को सूत्र बोहराया जाएगा, जिसका वाचन पूरे चातुर्मास के दौरान होगा।

सूत्र बोहराने का लाभ सरलादेवी-अमरचंद झाबक परिवार को प्राप्त हुआ है। वहीं पांच ज्ञान पूजा के विभिन्न लाभ क्रमशः भंवरीबाई परिवार, कमलाबाई-पारसचंद परिवार, कंचनबाई गोलछा परिवार, महेंद्र-पवन बुरड़ परिवार और कैलाशचंद पारख परिवार को प्राप्त हुए हैं। समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से धर्मसभा में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

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