छत्तीसगढ़

झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर वसूली, सिटी कोतवाली का आरक्षक निलंबित

रायगढ़, 23 जनवरी 2026। सिटी कोतवाली रायगढ़ में पदस्थ आरक्षक पर लगे अवैध वसूली, धमकी और मारपीट के गंभीर आरोपों के मामले में पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित आरक्षक को निलंबित कर दिया है। होटल संचालक की शिकायत के बाद उच्च अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेते हुए यह कदम उठाया है।

क्या है मामला?
कोतरा रोड निवासी होटल संचालक दीपक तिवारी ने बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर आरक्षक पर 1 लाख 15 हजार रुपये की अवैध मांग, शारीरिक मारपीट और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। शिकायत में बताया गया था कि दबाव में आकर वह 20 हजार रुपये नकद दे चुका है, जबकि शेष राशि के लिए लगातार धमकाया जा रहा था।

दीपक तिवारी ने शिकायत में बताया कि वह शहर में एक छोटा टपरी होटल चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता है। आरोप है कि एक फेरीवाले द्वारा राजश्री गुटखा के करीब 100 पैकेट दिए जाने के बाद उसे और दो अन्य लोगों को सिटी कोतवाली बुलाया गया। वहां पदस्थ पुलिसकर्मी लोमस राजपूत ने कथित तौर पर मामले से बचाने के एवज में 1 लाख 15 हजार रुपये की मांग की और रकम नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद उसे लगातार डराया-धमकाया गया, शारीरिक मारपीट की गई और मानसिक दबाव बनाया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह पूरी रकम नहीं दे सका, लेकिन भयवश 20 हजार रुपये नकद देने पड़े। आरोप है कि इसके बावजूद अब उससे और 15 हजार रुपये की मांग की गई, और पैसे नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई।

दीपक तिवारी ने शिकायत में कहा है कि वह कोई आदतन अपराधी नहीं है और इस तरह की कथित पुलिसिया प्रताड़ना से वह और उसका परिवार डरा हुआ है। उसने पूरे मामले को पद के दुरुपयोग, अवैध वसूली, धमकी और मारपीट की श्रेणी में बताया है, जिससे पुलिस विभाग की छवि को ठेस पहुंच रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद सिटी कोतवाली में पदस्थ आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिकायतकर्ता और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर भी आवश्यक कदम उठाए जाने की बात कही गई है।

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