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केंद्रीय बजट 2026-27: ‘विकसित भारत’ की दिशा में सरकार का बड़ा विज़न

इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और तकनीक पर जोर

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को केंद्र में रखा। अपने बजट भाषण की शुरुआत माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के उल्लेख के साथ करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने बीते 12 वर्षों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है और संरचनात्मक सुधारों के दम पर मजबूत विकास की राह पर आगे बढ़ा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए आयात पर निर्भरता कम की, कृषि उत्पादकता बढ़ाई और आम नागरिकों की क्रय शक्ति में सुधार किया। इन प्रयासों का परिणाम है कि भारत लगभग 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

तीन कर्तव्यों पर आधारित बजट का खाका
निर्मला सीतारमण ने बजट को युवा शक्ति से प्रेरित बताते हुए सरकार के तीन प्रमुख कर्तव्य रेखांकित किए—
पहला, आर्थिक विकास को तेज और सतत बनाए रखना।
दूसरा, नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमताओं का विकास करना।
तीसरा, ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के अनुरूप समावेशी विकास सुनिश्चित करना।

उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ढांचागत सुधारों की गति बनाए रखना, पूंजी का कुशल आवंटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों को शासन व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है।

सुधारों की रफ्तार और प्रमुख सेक्टर
वित्त मंत्री ने बताया कि रोजगार सृजन और विकास को गति देने के लिए सरकार ने अब तक 350 से अधिक आर्थिक सुधार लागू किए हैं। जीएसटी का सरलीकरण, श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य समन्वय इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
बजट में बायो-फार्मा, सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ, टेक्सटाइल, कैपिटल गुड्स और एमएसएमई जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है।

बायो-फार्मा क्षेत्र में अगले पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश और तीन नए राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 40 हजार करोड़ रुपये के व्यय से देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी नई रफ्तार
इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास का आधार बताते हुए वित्त मंत्री ने 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा। अगले पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग शुरू किए जाएंगे और मुंबई–पुणे, दिल्ली–वाराणसी सहित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की घोषणा भी की गई है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर जोर
बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है। अगले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर और डेढ़ लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय बढ़ाने, मत्स्य पालन के विकास, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है। कृषि में एआई आधारित ‘भारत-विस्तार’ कार्यक्रम की शुरुआत का भी एलान किया गया है।

राजकोषीय स्थिति
वित्त मंत्री ने बताया कि 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटकर 55.6 प्रतिशत रहने की संभावना है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ने दीर्घकालिक विकास, रोजगार सृजन और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक मजबूत रोडमैप के रूप में पेश किया है।

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