रायपुर बनेगा कमिश्नरेट शहर, साय कैबिनेट की मुहर
23 जनवरी 2026 से लागू होगा पुलिस कमिश्नर सिस्टम

रायपुर, 31 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था को नए ढांचे में लाने का रास्ता साफ हो गया है। साय कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए 23 जनवरी 2026 से रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही रायपुर प्रदेश का ऐसा शहर बन जाएगा, जहां पुलिस आयुक्त सर्वोच्च पुलिस अधिकारी होगा और उसके पास मजिस्ट्रियल अधिकार भी होंगे।
नवा रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित साय कैबिनेट की साल 2025 की अंतिम बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में यह अहम निर्णय लिया गया। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
एसएसपी की जगह पुलिस आयुक्त होगा सर्वोच्च अधिकारी
अब तक रायपुर में जिले का सबसे बड़ा पुलिस अधिकारी एसएसपी होता था, लेकिन कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) जिले की कानून-व्यवस्था का पूर्ण नियंत्रण संभालेगा। पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत मजिस्ट्रियल पावर भी प्राप्त होंगे, जिससे आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय संभव हो सकेगा।
पहला पुलिस कमिश्नर कौन?
रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा, इस पर फिलहाल निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, कमिश्नर बनने की दौड़ में आईजी रैंक के आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। चर्चा में जिन नामों की सबसे अधिक बात हो रही है, उनमें अजय यादव, अमरेश मिश्रा, बद्रीनारायण मीणा और संजीव शुक्ला शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में एक वर्ष की अवधि के लिए एक ओएसडी की नियुक्ति को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
पहले से तैयार था कमिश्नरी का रोडमैप
राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट लागू करने के लिए अक्टूबर महीने में ही एक प्रारूप तैयार किया गया था। यह प्रारूप उच्च स्तरीय समिति द्वारा बनाया गया और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को सौंपा गया था। समिति ने भुवनेश्वर कमिश्नरी मॉडल को आधार बनाते हुए लगभग 60 प्रतिशत नियमों को रायपुर में लागू करने का सुझाव दिया था। शेष 40 प्रतिशत नियम महाराष्ट्र, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, ओडिशा, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल से लिए जाने का निर्णय हुआ था।
क्या होता है पुलिस कमिश्नर सिस्टम?
पुलिस कमिश्नर प्रणाली आमतौर पर बड़े महानगरों में लागू होती है। यह व्यवस्था ब्रिटिश काल से चली आ रही है और पहले कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे प्रेसीडेंसी शहरों में लागू थी। इस सिस्टम में पुलिस आयुक्त को वही अधिकार मिलते हैं, जो सामान्यतः जिला कलेक्टर या कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से पुलिस को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, त्वरित निर्णय और कानून-व्यवस्था नियंत्रण में अधिक स्वतंत्रता मिलती है। इससे दंगे, उपद्रव, अपराध और आपात स्थितियों में तेजी से कार्रवाई संभव हो पाती है।
जवाबदेही भी बढ़ेगी
कमिश्नर सिस्टम के तहत पुलिस अधिकारियों को अधिक अधिकार मिलने के साथ-साथ उनकी जवाबदेही भी बढ़ जाती है। पुलिस कमिश्नर, डीसीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यों की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) और मुख्य सचिव को सौंपते हैं।
कमिश्नर सिस्टम का पदानुक्रम
पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में प्रमुख पद इस प्रकार होंगे—
पुलिस कमिश्नर (CP)
संयुक्त पुलिस आयुक्त (Jt. CP)
अपर पुलिस आयुक्त (Addl. CP)
डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP)
अतिरिक्त डिप्टी पुलिस कमिश्नर
सहायक पुलिस आयुक्त (ACP)
इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर व अन्य बल
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया, बेहतर जांच, सार्वजनिक शिकायतों का शीघ्र समाधान और तकनीक का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।



