छत्तीसगढ़
नन्ही कलम से : एक वृक्ष

मैंने आम का पौधा लगाया,
बड़ा मज़ा वो देता छाया।
फल आम के सबको आते,
बच्चे चिड़िया उसे खूब खाते।
पक्षी उसमें घोंसला बनाते,
परिवार संग रहते जाते।
मैं भी मज़े से आम हूँ खाता,
रस-गूदे के रस पी जाता।
लेकिन देना मुझे बदले में,
उपहार आपको भी है।
प्रकृति को बचाना,
तो एक पेड़ आप भी लगाना।
जीव-जंतु को है इसका सहारा,
पर्यावरण का साथ निभाना।
बाल कवि:
अमोघ विनोद शुक्ल



