छत्तीसगढ़
नन्ही कलम से : वृक्ष: हमारा प्राण-साखी

मेरे छोटे से आंगन में,
एक नन्हा सा सपना है।
पेड़ है मेरा प्यारा रक्षक,
इसका साया अपना है।
साँसें ये देता है हमको,
मीठे फल और फूल दिए।
धरती माँ का श्रृंगार है ये,
जीवन के ये मूल दिए।
डालें इसकी झूले जैसी,
हम भी उस पर झूलते हैं।
इसके पीछे लुका-छिपी,
खेल के दुख हम भूलते हैं।
छाँव बाँटता है ये सबमें,
भेद न कोई करता है।
सूरज की किरणों को पीकर,
ये हर पल ही जीता है।
आओ हम सब हाथ बढ़ाएं,
मिट्टी में एक बीज दबाएं।
पेड़ बचाएं, जीवन बचाएं,
दुनिया को फिर स्वर्ग बनाएं।.
बाल कवित्री
अनाया विनोद शुक्ल



