छत्तीसगढ़

18 साल बाद रायपुर के बड़ा मंदिर में जैन मुनि संघ का ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेश

मुनि आगम सागर बोले- 'Yes Boss' और अनुशासन से मिलती है सफलता

रायपुर, 19 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर में 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में ‘नवोदय तीर्थ वर्षायोग (चातुर्मास) 2026’ के तहत मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का भव्य और ऐतिहासिक मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे शहर में धर्ममय वातावरण देखने को मिला। केसरिया परिधानों में सजे समाजबंधुओं, कलश यात्रा, धर्म ध्वज, रंगोलियों और जयकारों के बीच निकली भव्य शोभायात्रा श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रही थी।

दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं वर्षायोग समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जैन ‘गुरु कृपा’ तथा कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि सुबह शंकर नगर स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा शास्त्री चौक और जयस्तंभ चौक होते हुए बड़ा मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने मुनि आगम सागर महाराज, मुनि पुनीत सागर महाराज, मुनि धैर्य सागर महाराज और मुनि स्वागत सागर महाराज ससंघ का भव्य स्वागत किया।

‘Yes Boss’ और अनुशासन ही सफलता की कुंजी: मुनि आगम सागर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आगम सागर महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता का मूल मंत्र अनुशासन और बड़ों की आज्ञा का पालन है।

उन्होंने कहा,

“परिवार को सुखी देखना चाहते हो तो हमेशा ‘Yes Boss’ कहने की आदत डालो और बड़ों का कहना मानो।”

उन्होंने बताया कि स्वयं भी उन्होंने अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और आज्ञापालन का मार्ग अपनाया, जिसकी बदौलत आज वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

मुनिश्री ने धर्म को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उसे जीवन में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रवचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मकल्याण का मार्ग हैं।

“कलऊ एकता बलम”, एकता ही सबसे बड़ी ताकत: मुनि पुनीत सागर

धर्मसभा में मुनि पुनीत सागर महाराज ने समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा,

“कलऊ एकता बलम” अर्थात कलयुग में एकता ही सबसे बड़ा बल है।

उन्होंने कहा कि बड़ा मंदिर समाज का मुख्य स्तंभ है और सभी शाखाओं को एकजुट होकर धर्म और संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए।

समय का सदुपयोग करने का संदेश

मुनि पुनीत सागर ने समय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी के हाथ में घड़ी होती है, लेकिन वास्तव में इंसान समय के हाथ में होता है। इसलिए हर पल का सदुपयोग कर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

धर्मसभा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुनियों के प्रेरक प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, एकता और आत्मकल्याण का संदेश दिया। 18 वर्षों बाद बड़ा मंदिर में हुए इस ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेश को जैन समाज ने अविस्मरणीय और गौरवपूर्ण अवसर बताया।

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