नकटी की चारागाह भूमि पर विधायक कॉलोनी, अकबर बोले- कहीं सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तो नहीं?

रायपुर, 19 जुलाई 2026। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने रायपुर के नकटी गांव की सार्वजनिक उपयोग (चारागाह) भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस भूमि के आवंटन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना की स्थिति पैदा कर सकती है।
अकबर ने बयान जारी कर कहा कि 10 मार्च 2011 को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी कलेक्टरों और संभागायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 24 जनवरी 2011 के आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा था। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि, विशेषकर निस्तारी और चारागाह भूमि को चिन्हित कर सुरक्षित रखा जाए तथा भविष्य में उसका अन्य प्रयोजनों के लिए आवंटन न किया जाए।
‘चारागाह भूमि का आवंटन नियमों के खिलाफ’
मोहम्मद अकबर ने कहा कि यदि रायपुर कलेक्टर, आवास एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशों के आधार पर सांसदों और विधायकों के आवास के लिए नकटी की चारागाह भूमि को हाउसिंग बोर्ड को आवंटित करते हैं, तो यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अवमानना हुई है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित न्यायालय ही करेगा।
अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रमुख सचिव का आदेश आज भी प्रभावी है, इसके बावजूद संबंधित अधिकारी चारागाह भूमि खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, जो आश्चर्यजनक है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद अब तक न्यायालय की अवमानना के किसी मामले में सजा नहीं हुई है, लेकिन राज्य गठन से पहले जबलपुर हाईकोर्ट ने रायपुर के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक सहकारिता को 15 दिन की सजा सुनाई थी।
अकबर ने सरकार से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने और सार्वजनिक उपयोग की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।



