बिना अनुमति क्रेशर, वन भूमि में खनन और करोड़ों का खेल! BRO परियोजना पर उठे बड़े सवाल

सुकमा/बीजापुर, 1 अगस्त 2026। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की सड़क परियोजना की आड़ में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन और बिना अनुमति क्रेशर संचालन का मामला सामने आया है। आरोप है कि वन भूमि से बिना वैधानिक अनुमति हजारों ट्रिप बोल्डर निकालकर सड़क निर्माण के साथ-साथ स्थानीय बाजार और पड़ोसी राज्य तेलंगाना तक गिट्टी की आपूर्ति की गई। मामले में करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के तुमलपाड़ स्थित वन परिक्षेत्र जगरगुंडा के पूवर्ती-1 डीपीएफ कक्ष क्रमांक 475 की लगभग एक हेक्टेयर वन भूमि से गौण खनिज का उत्खनन किया गया। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि यहां से निकाले गए बोल्डर BRO परियोजना में उपयोग किए गए, जबकि बड़ी मात्रा में गिट्टी अन्य स्थानों पर भी बेची गई।
BRO के नाम पर गिट्टी परिवहन का आरोप
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि कुछ क्रेशर संचालकों ने BRO परियोजना का नाम इस्तेमाल कर कथित सिंडिकेट तैयार किया। आरोप है कि गिट्टी परिवहन करने वाले वाहनों पर BRO परियोजना से जुड़े दस्तावेज चस्पा कर जांच से बचने की कोशिश की जाती थी। दावा किया जा रहा है कि तेलंगाना के भद्राचलम और चेरला तक भी गिट्टी की आपूर्ति की गई।
बिना अनुमति एक साल से संचालित क्रेशर?
मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति संचालित क्रेशर प्लांट को लेकर सामने आया है। वर्तमान में सुकमा और बीजापुर दोनों जिलों का प्रभार संभाल रहे खनिज अधिकारी छबीलेश्वर मौर्य ने बताया कि सुकमा तथा बीजापुर जिले के तरेम स्थित क्रेशर प्लांट को अभी तक औपचारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। उनके अनुसार उच्च अधिकारियों की मौखिक सहमति के आधार पर संचालन शुरू किया गया था, जबकि नियमित अनुमति संबंधी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

यदि यह दावा सही है तो सवाल उठ रहे हैं कि बिना वैधानिक स्वीकृति के लगभग एक वर्ष तक खनन और गिट्टी उत्पादन किस आधार पर होता रहा तथा इस दौरान सरकार को कितना राजस्व मिला या नुकसान हुआ।
मीडिया कवरेज रोकने के आरोप
मीडिया कर्मियों ने आरोप लगाया है कि कवरेज के दौरान क्रेशर संचालकों से जुड़े लोगों ने सीआरपीएफ जवानों को बुलाया। आरोप है कि जवानों ने नक्सल क्षेत्र का हवाला देते हुए फोटो और वीडियो बनाने से रोका तथा मीडिया कर्मियों को वहां से हटने के लिए कहा। हालांकि इस संबंध में सीआरपीएफ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बिना फिटपास गिट्टी परिवहन पर भी विवाद
मीडिया के अनुसार, बिना फिटपास गिट्टी ले जा रहे एक टिप्पर को बासागुड़ा के पास रोका गया और खनिज विभाग को सूचना दी गई। आरोप है कि जांच पूरी होने से पहले ही वाहन को छोड़ दिया गया, जिससे बासागुड़ा थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, आवापल्ली क्षेत्र में एक अन्य गिट्टी से भरे वाहन पर तहसीलदार ने कथित रूप से बिना फिटपास परिवहन पाए जाने पर कार्रवाई की।
कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण और खनन कार्य के लिए ग्रामीणों से ग्राम सभा में कई विकास कार्यों का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जांच की मांग के बीच कई सवाल
मामले को लेकर कई अहम सवाल उठ रहे हैं—क्या बिना अनुमति क्रेशर संचालन किया गया? वन भूमि से निकाले गए खनिज का रिकॉर्ड क्या है? सरकार को कितना राजस्व मिला और कितना नुकसान हुआ? BRO परियोजना के नाम पर कथित अवैध परिवहन की जिम्मेदारी किसकी है? और मीडिया कवरेज रोकने के आरोपों की सच्चाई क्या है?
फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



