छत्तीसगढ़

BRO परियोजना पर नए सवाल: क्रेशर अवैध तो बारूद किसकी अनुमति से फूटा?

सुकमा-बीजापुर में अवैध खनन पर नया खुलासा

बीजापुर/सुकमा, 3 अगस्त 2026। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की सड़क परियोजना की आड़ में कथित अवैध खनन और क्रेशर संचालन का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। पहले वन भूमि पर अवैध उत्खनन और बिना अनुमति क्रेशर प्लांट चलाने के आरोप सामने आए थे, वहीं अब विस्फोटकों (बारूद) के इस्तेमाल को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में वन विभाग, खनिज विभाग और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

बिना अनुमति क्रेशर तो ब्लास्टिंग किसकी मंजूरी से?

सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अधिक समय तक वन भूमि में बड़े पैमाने पर पहाड़ों की कटाई कर पत्थर निकाले गए और उन्हें क्रेशर में गिट्टी में बदला गया। इस काम में पोकलेन, ड्रिलिंग मशीन और अन्य भारी मशीनों का उपयोग किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्रेशर प्लांट के पास वैध अनुमति नहीं थी, तो पहाड़ों में ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों की अनुमति किस विभाग ने दी? विस्फोटकों के भंडारण, परिवहन और उपयोग का रिकॉर्ड किसके पास है और क्या इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था? इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं।

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वन विभाग की निगरानी पर भी सवाल

आरोप है कि वन भूमि पर लंबे समय तक ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग और भारी मशीनों की आवाजाही होती रही। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या वन विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई।

एक अधिकारी, दो जिले और कार्रवाई पर सवाल

बीजापुर और सुकमा दोनों जिलों का प्रभार एक ही खनिज अधिकारी के पास होने को लेकर भी चर्चा तेज है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई नहीं होने से कथित अवैध गतिविधियां लगातार चलती रहीं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या विभागीय लापरवाही थी या कार्रवाई पर किसी प्रकार का दबाव था।

व्हाट्सएप पर गिट्टी की रेट लिस्ट भेजने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, कथित क्रेशर संचालकों द्वारा स्थानीय ठेकेदारों से संपर्क कर गिट्टी सप्लाई की पेशकश की जा रही है। दावा है कि जगदलपुर बाजार भाव के आधार पर गिट्टी उपलब्ध कराने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से रेट लिस्ट भी भेजी जा रही है। यदि यह सही है, तो यह सवाल भी उठता है कि BRO परियोजना के लिए तैयार की गई सामग्री अन्य निजी निर्माण कार्यों तक कैसे पहुंच रही है।

‘फ्री का पहाड़, करोड़ों का कारोबार’ के आरोप

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि प्राकृतिक संसाधनों से निकाली गई गिट्टी का परिवहन कथित रूप से बिना वैध फिटपास के किया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अधूरे दस्तावेजों के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।

BRO का नाम लेकर कारोबार बढ़ाने की कोशिश?

सूत्रों का यह भी दावा है कि BRO परियोजना में सप्लाई का हवाला देकर आसपास की अन्य सड़क निर्माण परियोजनाओं के ठेकेदारों से भी संपर्क किया जा रहा है और गिट्टी सप्लाई के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं।

खनिज अधिकारी के बयान में विरोधाभास

पूरे मामले पर खनिज अधिकारी छबीलेश्वर मौर्य ने कहा कि सुकमा में संचालित क्रेशर प्लांट के पास अनुमति नहीं है और वहां हुई ब्लास्टिंग की कोई जानकारी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। वहीं उन्होंने बीजापुर के तररेम स्थित क्रेशर को वैध बताते हुए कहा कि उसे लगभग एक वर्ष पहले अनुमति मिल चुकी है।

हालांकि, उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने पहले विभाग से प्राप्त जानकारी में तररेम स्थित इस क्रेशर का कोई उल्लेख नहीं था, जिससे विभागीय रिकॉर्ड और वर्तमान दावों में विरोधाभास सामने आ रहा है।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

  • यदि क्रेशर अवैध था, तो बारूद और ब्लास्टिंग की अनुमति किसने दी?
  • वन भूमि पर पहाड़ों की खुदाई की मंजूरी किस विभाग ने दी?
  • विस्फोटकों के उपयोग का रिकॉर्ड किसके पास है?
  • एक वर्ष तक कथित अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • अधूरे दस्तावेजों के बावजूद भुगतान किस आधार पर किया गया?
  • व्हाट्सएप के जरिए गिट्टी बेचने के दावे किस अधिकार से किए जा रहे हैं?
  • क्या पूरे मामले की संयुक्त और निष्पक्ष जांच होगी?

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले को लेकर अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन, वन विभाग, खनिज विभाग और BRO के आधिकारिक रुख पर हैं। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन संपदा, सरकारी राजस्व, विस्फोटक नियमों और परियोजना निगरानी व्यवस्था से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करेगा।

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